सिर दर्द की दवा टेबलेट नाम?HealthPlanet

Posted on Tue 7th May 2019 : 07:07

सिरदर्द मिटाने वाली दवाओं की ओवरडोज ही सिरदर्द की वजह
4 वर्ष पहले



पेनकिलर की ओवरडोज लेने से किडनी और िलवर डेमेज होता है। पेनकिलर्स के बारे में ज्यादातर लोगों को यही मालूम हैं। लेकिन दर्द दूर करने के लिए ली जाने वाली दवाई भी दर्द की वजह बन रही हैं। इससे लोग अन्जान हैं। विशेष रूप से सिर दर्द में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां लंबे समय तक लेने पर सिर दर्द का कारण बन रही हैं। आजकल हैडेक एक सामान्य प्रॉब्लम बन चुका है। हल्का सा हैडैक होने पर लोग पेनकिलर ले रहे हैं। यह पेनकिलर उनकी रुटीन का हिस्सा बन चुकी है। लंबे समय तक रेगुलर ये पेनकिलर सीवियर हैडेक पैदा कर रही है। यह हैडैक बाद में दवाइयां लेने के बाद भी ठीक नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते लोगों की लाइफस्टाइल प्रभावित हो रही है। वहीं, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम भी बढ़ रही है। यहीं नहीं, रुटीन में ली जाने वाली एलर्जी, एसिडिटी, नर्व पेन, ब्लड और शुगर मेडिसीन को ओवरयूज भी नुकसानदायक साबित हो रहा है।

माइग्रेन से ज्यादा खतरनाक हैडेक



सिर दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह पर पेनकिलर लेना शुरू करते हैं। पेनकिलर से रिलीफ मिलने पर पेशेंट्स अपनी इच्छानुसार इन दवाइयों की फ्रीक्वेंसी बढ़ा देता है। जिसके चलते एक मात्रा से ज्यादा लगातार ये दवाइयां खाने से ये एक अलग तरह का हैडेक पैदा करती है। यह हैडैक माइग्रेन से अलग होता है। एक स्टडी में यह पाया गया कि आईब्रूफीन, कॉम्बिफ्लेम, नींबू स्लाइड जैसी पेनकिलर लंबे समय तक लेने से उन लोगों में भी हैडेक हो जाता है। जिन्हें कभी हैडेक हुआ ही नहीं था। यह हैडेक इतना तेज होता है कि यह किसी भी दवाई से ठीक नहीं होता है। क्योंकि पेशेंट्स पहले ही पेनकिलर खा चुके होते हैं। इस दर्द में ट्रीटमेंट करना मुश्किल हो जाता है। एेसे में, इन पेशेंट्स का ट्रीटमेंट करते हुए इन दवाइयों को बंद किया जाता है। पेशेंट्स का डिटॉक्सिफिकेशन किया जाता है। यानी बॉडी से पूरा टॉक्सिन निकाला जाता है। बिना पेन किलर उसका दर्द ठीक किया जाता है। इसके लिए लाइफस्टाइल में बदलाव, प्रणायाम और मेडिटेशन करवाया जाता है। इस दर्द को ठीक करने में तीन महीने का समय लगता है।

कौन-कौन सी मेडिसिन की ओवरडोज बढ़ाती है हैडेक

कॉम्बिफ्लेम, पैरासिटामोल, ब्रूफेन, निमुसलाइट, नेप्रोक्सीन।

कितने प्रकार का होता है हैडेक

टेंशन हैडेक, क्लस्टर हैडेक, माइग्रेन, हॉर्मोनल हैडेक, कैफीन हैडेक, एलर्जी और साइनस हैडैक, प्राइमरी और सैकंडरी

तेज सिर दर्द का असर

पेशेंट दिनभर कोई एक्टीविटी नहीं कर पाता है। वह दिनभर चिड़चिड़ा रहने के कारण सोता रहता है। सिर दर्द की गोली खाता है। फिर सिरदर्द बढ़ता है।

बचने के लिए क्या करें

सिंगल साल्ट की टेबलेट महीनेभर में 15 से कम खाएं। कॉम्बिनेशन वाले साल्ट की टेबलेट महीने में 10 से कम खाएं।

एक्सपर्ट पैनल : डॉ. सीबी सहाय, न्यूरोलॉजिस्ट, रिम्स, रांची, डॉ. जेके मित्रा फिजिशियन, रिम्स, रांची।

सिट्राजिन की ओवरडोज

ब्रेन को बना देती है डल

हैडैक के अलावा एसिडिटी, गैस, जुकाम और एलर्जी की दवाइयां भी रेगुलर खाते हैं। जुकाम और एलर्जी होने पर सिट्राजीन बार-बार खाते हैं। इस टेबलेट की ओवरडोज लेने पर पेशेंट्स को डलनैस महसूस होती है। वह हमेशा नींद में रहता है। इसके अलावा एसिडिटी की दवाइयां खाने से एसिड का सप्रेशन हो जाता है। पेशेंट्स पेट में हल्की सी जलन महसूस होने पर यह दवाइयां खाना शुरू कर देता है। इससे डाइजेशन के लिए जरूरी एसिड भी खत्म हो जाता है। पेट की स्किन सिकुड़ जाती है। जिसकी वजह से विटामिन बी 12 की कमी होती है। इसके साइडइफेक्ट्स चालू हो जाते हैं। वहीं, बिना डॉक्टर की सलाह हल्की सी जुकाम और खांसी में एंटीबॉयोटिक्स लेना भी नुकसानदायक है। ज्यादातर लोग एंटीबॉयोटिक्स का कोर्स पूरा नहीं कर पाते हैं। इससे रेजिस्टेंट्स डवलप होता है। डाइजेशन बिगड़ जाता है। इसिलए एंटीबॉयोटिक्स के ओवरयूज से बचे।

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